फास्ट न्यूज़ इंडिया मध्य प्रदेश शिवपुरी पिछोर। कमिश्नर के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाया गंभीर लापरवाही का आरोप
मध्य प्रदेश शिवपुरी पिछोर। कमिश्नर के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज, ग्रामीणों ने प्रशासन पर लगाया गंभीर लापरवाही का आरोप भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व रिकॉर्ड की अनदेखी के खिलाफ आज ग्राम पंचायत खडोंय (मोतीपुरा) के किसानों और ग्रामीणों ने एसडीएम कार्यालय पिछोर का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मामला गांव की श्मशान भूमि पर अवैध कब्जे और 20 साल पुराने कोर्ट आदेश की आज तक तामीली न होने से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की खामियों के कारण आज भी गांव का श्मशान अवैध कब्जे में है, जिससे अंतिम संस्कार तक के लिए लोगों को जगह नहीं मिल पा रही है।
क्या है पूरा मामला
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम खडोंय में सर्वे नंबर 818 की भूमि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से ‘श्मशान’ के रूप में दर्ज है। वर्ष 2002-03 में नियमों को ताक पर रखकर इस श्मशान भूमि का विनिमय (अदला-बदली) कर गुड्डी जाटव नामक व्यक्ति के नाम पट्टा कर दिया गया। इस गंभीर अनियमितता को लेकर मामला ग्वालियर कमिश्नर कोर्ट पहुँचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद 4 अक्टूबर 2004 को कमिश्नर, ग्वालियर संभाग ने स्पष्ट आदेश पारित किया कि श्मशान की भूमि का विनिमय पूरी तरह अवैध है। ग्राम पंचायत की आपत्ति को नजरअंदाज करना गलत था। संबंधित पट्टा और विनिमय तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। 20 साल बाद भी कागजों में कब्जाधारी का नाम हैरानी की बात यह है कि कोर्ट के आदेश को 20 साल बीत जाने के बावजूद आज भी खसरा-खतौनी में उसी व्यक्ति का नाम दर्ज है। इसी कागजी गड़बड़ी का फायदा उठाकर कब्जाधारी श्मशान की जमीन खाली करने से इनकार कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे श्मशान का उपयोग करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें झूठी एफआईआर और फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है। एसडीएम का पक्षरू ‘आदेश हमारे संज्ञान में नहीं था’ मोतीपुरा के किसानों के आक्रोश के बाद एसडीएम पिछोर ममता शाक्य ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा।
1. कमिश्नर आदेश पर अज्ञानता
एसडीएम ने कहा
“2002 में जो पट्टा हुआ था, उसे कमिश्नर कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। यह आदेश अब तक राजस्व विभाग के संज्ञान में नहीं था। अब मामला सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई शुरू की गई है।”
2. श्मशान भूमि के विनिमय को बताया अवैध एसडीएम ने स्वीकार किया
“श्मशान की भूमि का विनिमय नियमों के विरुद्ध था, इसी कारण इसे निरस्त किया गया। दस्तावेजों में हेराफेरी की जांच की जा रही है।”
3. बेदखली और थ्प्त् पर आश्वासन “नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कर न्यायालय के माध्यम से बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।”
4. 20 साल की देरी पर जवाब “पुराने रिकॉर्ड में मामला दब गया था, लेकिन अब प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।” ग्रामीणों का सवाल क्या न्याय के लिए 20 साल इंतजार करना पड़ेगा? एसडीएम के जवाबों से ग्रामीण संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना है कि यदि कमिश्नर का आदेश भी 20 साल तक ‘सिस्टम’ में दबा रह सकता है, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा?
ग्रामीणों की पीड़ाकृ उन्हीं की जुबानी
संजीव लोधी (खडोंय मोतीपुरा) ने बताया
“2002 में अधिकारियों से साठगांठ कर श्मशान की जमीन का फर्जी पट्टा करवाया गया। 2004 में कमिश्नर ने उसे निरस्त कर दिया, लेकिन आज तक रिकॉर्ड नहीं सुधरे। कब्जाधारी आज भी धमकियां दे रहा है। हम सिर्फ कोर्ट के आदेश का पालन चाहते हैं।”
बृजेंद्र लोधी ने कहा
“दबंग ने पहले थोड़ी जमीन ली, फिर पूरी श्मशान भूमि पर कब्जा कर लिया। आवाज उठाई तो झूठे हरिजन एक्ट के केस लगवाए। गांव में अंतिम संस्कार तक के लिए जगह नहीं बची है।”
अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कर श्मशान की जमीन कब्जा मुक्त नहीं कराई गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब देखना यह है कि 20 साल पुराने कोर्ट आदेश पर प्रशासन कब अमल करता है, या फिर यह मामला भी कागजों में ही दबकर रह जाएगा। रिपोर्टर राजू जाटव पिछोर
