फ़ास्ट न्यूज इंडिया पीलीभीत
पीलीभीत जनपद के पूरनपुर क्षेत्र स्थित रायपुर गोरा इन दिनों आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ है। यहां सूफी संत हज़रत सफदर मियां रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स बड़े ही अकीदत, सम्मान और धार्मिक उल्लास के साथ शुरू हो गया। उर्स के आगाज़ के साथ ही दरगाह परिसर और आसपास का इलाका “या हज़रत” की सदाओं से गूंज उठा। दूर-दराज़ से पहुंचे अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादरपोशी कर अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआएं मांगी।
उर्स के पहले दिन पारंपरिक रस्मों के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ। दरगाह शरीफ को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर नजर आया। अकीदतमंदों की भारी भीड़ सुबह से ही दरगाह पर पहुंचने लगी। लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई, फातिहा पढ़ी और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित महफिल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शायरों, उलमाओं और सूफी विद्वानों ने हज़रत सफदर मियां रहमतुल्लाह के जिंदगी, उनकी शिक्षाओं और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से रोशनी डाली। उलमाओं ने बताया कि हज़रत सफदर मियां ने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश फैलाने में बिताई। उन्होंने समाज में फैली बुराइयों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को सादगी, सेवा और आध्यात्मिक जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
उलमाओं ने कहा कि हज़रत सफदर मियां का जीवन आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने बताया कि संत ने हमेशा इंसानियत को सबसे ऊपर रखा और जाति-धर्म से परे जाकर लोगों को जोड़ने का काम किया। उनके दरबार में हर वर्ग और समुदाय के लोग बराबरी के साथ आते थे, जो सामाजिक समरसता की मिसाल है।
शाम ढलते ही महफिल-ए-नात और सूफियाना कलाम का दौर शुरू हुआ। मशहूर शायरों ने अपने कलाम के जरिए हज़रत की शान में नज़राना-ए-अकीदत पेश किया। शायरों की प्रस्तुतियों ने माहौल को रूहानी बना दिया। अकीदतमंद झूम उठे और देर रात तक महफिल जारी रही। सूफियाना कलाम और कव्वालियों ने उपस्थित लोगों को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
उर्स में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर साल यहां हाज़िरी देने आते हैं। उनका मानना है कि हज़रत सफदर मियां की दरगाह पर सच्चे दिल से मांगी गई दुआ कबूल होती है। कई लोगों ने अपनी मन्नतें पूरी होने की बात भी साझा की। श्रद्धालुओं ने दरगाह परिसर में लंगर का भी आयोजन किया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया — यह दृश्य आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक बना।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि उर्स के दौरान सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। स्थानीय प्रशासन भी कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग कर रहा है।
उर्स के अवसर पर सामाजिक और धार्मिक संदेश भी दिए गए। वक्ताओं ने युवाओं से नशे और बुराइयों से दूर रहने, शिक्षा को अपनाने और समाज सेवा में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतों की शिक्षाएं आज के समय में और भी प्रासंगिक हैं, जब समाज को एकता और सद्भाव की सबसे ज्यादा जरूरत है।
स्थानीय लोगों के लिए यह उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मेल-मिलाप का भी अवसर है। यहां लगने वाली दुकानों, मेले और पारंपरिक खानपान ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ा दी। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी इस आयोजन में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में देश और दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ की गई। उर्स का यह आयोजन आने वाले दिनों में भी विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा।
हज़रत सफदर मियां रहमतुल्लाह का सालाना उर्स एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि सूफी संतों की परंपरा प्रेम, सेवा और इंसानियत की बुनियाद पर टिकी है। रायपुर गोरा की यह पावन धरती हर साल इसी तरह आस्था और एकता का केंद्र बनकर लोगों को जोड़ती रहे — यही दुआ हर अकीदतमंद की जुबां पर थी। रिपोर्ट जियाउल हक खान 151173981
