फास्ट न्यूज़ इंडिया उत्तराखंड
गदरपुर। राजनीति में अक्सर घेराबंदी बंद कमरों और प्रेस नोट के जरिए होती है, लेकिन गदरपुर की धरती पर लोकतंत्र का एक ऐसा दुर्लभ नजारा दिखा जिसने 'शिष्टाचार' और 'सियासी चातुर्य' की नई परिभाषा लिख दी। इसे इत्तेफाक कहें या विधायक का आत्मविश्वास, कि जिस वक्त विपक्षी खेमा उन पर आरोपों की बौछार करने की पटकथा पढ़ रहा था, क्षेत्रीय विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय स्वयं वहां 'प्रकट' हो गए।
आरोपों की गूँज और अचानक सन्नाटा
वाकया किसी सस्पेंस फिल्म के क्लाइमैक्स जैसा था। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ प्रेस वार्ता कर रहे थे। पत्रकारों के कैमरे ऑन थे, तीखे सवालों का ड्राफ्ट तैयार था और विधायक जी पर हमलों की तैयारी थी। अभी आरोपों की फेहरिस्त मेज पर सज ही रही थी कि अचानक दरवाजा खुला और बेबाक मुस्कान के साथ अरविंद पांडेय अंदर दाखिल हुए। अचानक हुई इस 'एंट्री' से हॉल की धड़कनें मानों कुछ पलों के लिए थम गईं और विपक्ष के दिग्गज हक्का-बक्का रह गए।
विपक्ष की पिच पर 'फ्रंट फुट' खेल गए पांडेय
आमतौर पर राजनेता आरोपों से बचते नजर आते हैं, लेकिन अरविंद पांडेय ने सीधा मोर्चा संभालकर यह संदेश दे दिया कि जिसे अपनी ईमानदारी और जनता के आशीर्वाद पर भरोसा हो, उसे किसी 'चक्रव्यूह' का डर नहीं होता। उन्होंने विपक्ष की पिच पर कदम रखकर न केवल उनकी घेराबंदी को कुंद किया, बल्कि अपनी निडर मौजूदगी से यह साबित कर दिया कि वे छिपकर वार करने वालों में से नहीं, बल्कि आंखों में आंखें डालकर जवाब देने वाले नेता हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि राजनीति की तल्खी के बीच भी मर्यादा का पालन हुआ। जहाँ भुल्लर ने अपनी सक्रियता और युवा जोश दिखाया, वहीं विधायक पांडेय ने अपने अनुभव और 'स्वैग' से पूरी बाजी अपने नाम कर ली। सत्ता के गलियारों में अब इसे विधायक जी का 'मास्टरस्ट्रोक' कहा जा रहा है, जिसने आरोपों के शोर को चर्चा के नए दौर में बदल दिया।
गदरपुर की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक अब बस एक ही चर्चा है— "पिक्चर अभी बाकी है!" क्योंकि इस 'फेस-ऑफ' ने यह साफ कर दिया है कि गदरपुर की सियासत में नायक वही है जो हर चुनौती का सामना मुस्कुराते हुए करने का हौसला रखता हो। शाहनूर अली स्टेट ब्यूरो चीफ उत्तराखंड 151045804
