महाभारत काल से जुड़ा माँ काली का प्राचीन मंदिर, जहाँ आज भी अश्वत्थामा के पूजन की मान्यता
यूपी इटावा: यह प्राचीन मंदिर अपनी उत्पत्ति और मान्यताओं के कारण क्षेत्र में विशेष श्रद्धा और रहस्य का केंद्र माना जाता है। स्थानीय पुरातन कथाओं के अनुसार, यह स्थल महाभारत काल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।
लोककथाओं में कहा जाता है कि महाभारत के अमर पात्र अश्वत्थामा प्रतिदिन प्रातःकाल माँ काली की पूजा-अर्चना करने यहाँ आते हैं। यह मान्यता वर्षों से चली आ रही है और भक्तों के बीच बेहद प्रचलित है।
मंदिर से जुड़ी एक और रहस्यमयी मान्यता यह है कि हर सुबह जब गर्भगृह के कपाट खोले जाते हैं, तो वहाँ ताजे फूल पाए जाते हैं। इसी कारण अनेक श्रद्धालु यह विश्वास करते हैं कि यहाँ कोई दिव्य शक्ति स्वयं माँ काली की पूजा करती है।
यह मंदिर स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी मनोकामना पूर्ति का प्रमुख स्थल माना जाता है। भक्त अपनी विभिन्न इच्छाओं और जीवन की कठिनाइयों के समाधान की कामना लेकर यहाँ दर्शन करने आते हैं।
कहा जाता है कि यह मंदिर एक समय सिद्ध पीठ के रूप में भी जाना जाता था। मान्यता है कि चंबल क्षेत्र के कुख्यात डकैत भी यहाँ माँ काली को सम्मानपूर्वक नमन करने आते थे।
नवरात्रि, विशेष पूजा-अर्चना और पर्वों के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है। देखे
इटावा से शिवा कश्यप की रिपोट


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