हरिद्वार के विनायक क्लीनिक के लोकप्रिय डॉ. हेमंत जयसिंह जो रूमैटॉलोजिस्ट , बाल पोषण चिकित्सक पे कार्यरत हैँ वह् अलग तरीके से मरीजों का इलाज करते हैं। हेमंत जयसिंह नर्व थेरेपी के संस्थापक हैं। उन्होंने नसों के इलाज के लिए मैनुअल नर्व थेरेपी विकसित की है। यह थेरेपी फिट्स (दौरे), स्लिप डिस्क सर्वाइकल, घुटनोँ मेँ गैप, सैरिब्रल पाल्सी, औटिस्म, दिमाग की कोशिकाएँ, ए.वी.एन, बोन टीबी, पैरालिसिस, ऑटो इम्यून डिसऑर्डर, जेनेटिक डिसऑर्डर आदि लिए भी कारगर है। उन्हेँ वर्ष 2022 मेँ भारत चिकित्सा पुरस्कार और राष्टीय गौरव अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है । उन्होँने कई जटिल केस हल किये हैँ जिसमेँ कई रोगियोँ की व्हील चेयर छूटी और कई रोगियोँ के मिर्गि के दौरे भी बंद हुए और यह मरीज हरिद्वार, ज्वालापुर, कलखल, और बहार से जैसे धामपुर, नजीबाबाद, दिल्ली, पिथोरागड, रुद्रप्रयाग, चंडीगड, नैपाल, यू.एस आदि बाहर से आ रहे हैँ। इसके अलावा बहार से अफगानिस्तान ,आस्ट्रेलिआ आदि से क्वेरियाँ भी आ रही हैँ । शुरूआरती कुछ वर्ष मर्म थैरैपी मेँ प्रैक्टिस करने बाद उन्होँने नर्व थैरैपी निकाली, जिसमेँ मर्म थैरैपी मेँ केवल मर्म बिंदु होते हैँ, जबकि नर्व थैरैपी मेँ नसेँ और जोआईंट्स के बिंदु होते हैँ। अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान, उन्हें भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से उनकी अंग्रेजी कविता "सेंटीमेंट्स ऑफ काइट" के लिए एक प्रेरक पत्र मिला। अपनी बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने 2007 में उत्तराखंड कॉमन प्री मेडिकल टेस्ट (यूपी) उत्तीर्ण किया। निकटवर्टी कालेज ना मिलने के कारण उन्होंने हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से फार्मेसी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, जहाँ उन्होंने 2009, 2010 और 2011 में तीन बार विश्वविद्यालय टॉपर होने का प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किया। इसके बाद, उन्हें 2011 में एसबीएल होम्योपैथी कंपनी में प्लेसमेंट मिला। लेकिन उन्होंने नौकरी करने का विकल्प नहीं चुना। इसके अलावा, उन्होंने मेडिकल इंटर्नशिप की और क्लिनिकल फार्मेसी काउंसिल से रुमेटोलॉजी और बाल रोग में कंसल्टेंट फार्मास्युटिकल केयर स्पेशलिस्ट (सीपीसीएस) के रूप में विशेषज्ञता प्रमाणपत्र प्राप्त किया। डॉ. जयसिंह ने इग्नू से बाल चिकित्सा पोषण में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र और फार्मा रिसर्च इंस्टीट्यूट से क्लिनिकल रिसर्च में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त करके अपनी शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से सीएमएस और ईडी एलोपैथी की पढ़ाई पूरी की । स्नातक के साथ-साथ, उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी भी शुरू कर दी। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) मुख्य परीक्षा और 2022 में उत्तराखंड उच्चतर पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 2023 में उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा दी। दूसरी और दूसरे सैक्शन मेँ रसोली और गाँठ का सफल ईलाज डाँ वीनू जयसिँघ द्वारा किया जा रहा है, जो कि बी.ए.एम.एस, सी.जी.ओ (स्त्री रोग एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ), सी.एन.सी.सी (बाल पोषण एवं बाल देखभाल), मर्म चिकित्सक हैँ |
डाँ हेमंत जयसिँघ
(यूनिवर्सिटी गोल्ड मैडलिस्ट)
रूमेटोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक न्यूट्रिशनिस्ट, नर्व थेरेपी के संस्थापक
REG NO. IND/PH/CPCS/16/UK/09083
(कॉपीराइट नंबर L-124676/2023) ]
(क्वालिफाइड UK अपर PCS प्रीलिम्स 2022)
UPSC ऑनलाइन एकेडमी.कॉम पर लेखक और निदेशक
(प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए 27 से ज़्यादा किताबें लिखीं)
