प्रयागराज के संगम तट पर शंकराचार्य से जुड़ा विवाद करीब तीन घंटे तक चला।
मौके पर पुलिस ने दो बार शंकराचार्य के साथ मौजूद लोगों को हिरासत में लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शंकराचार्य जी के रथ को जबरन संगम क्षेत्र से बाहर कर दिया गया। इस दौरान शंकराचार्य बार बार यह सवाल करते रहे कि उन्हें धक्का देने वाले लोग कौन हैं।
घटना के समय स्थिति तनावपूर्ण बनी रही और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि शंकराचार्य कोई साधारण धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं।
वे हिंदू धर्म की सर्वोच्च परंपरा से जुड़े चार शंकराचार्यों में से एक हैं। उनकी उपाधि और धार्मिक हैसियत ऐतिहासिक और संवैधानिक रूप से स्थापित है।
संगम जैसे अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक महत्व वाले स्थल पर इस प्रकार की घटना प्रशासनिक समन्वय की कमी को उजागर करती है। एक प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति के साथ सार्वजनिक स्थान पर बल प्रयोग जैसी स्थिति कानून व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
अब यह जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह स्पष्ट करे कि हस्तक्षेप किन परिस्थितियों में किया गया और यह आदेश किस स्तर से दिया गया।
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