मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने और जल संरक्षण हेतु जिला प्रशासन का बड़ा फैसला; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
फास्ट न्यूज़ इंडिया उत्तराखंड रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर): जनपद में गिरते भूजल स्तर और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। वर्ष 2025 के उपरांत अब जिले में 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक ग्रीष्मकालीन धान की बुवाई, रोपाई और नर्सरी तैयार करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
खरीफ सीजन के लिए नया शेड्यूल जारी
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, खरीफ की फसल के लिए समय-सारिणी निर्धारित कर दी गई है:
- सीधी बुवाई: खरीफ धान की सीधी बुवाई अब 1 मई से 30 जून के बीच ही की जा सकेगी।
- नर्सरी: धान की नर्सरी लगाने का कार्य भी 1 मई से 30 जून तक संपन्न करना होगा।
- रोपाई: जनपद में धान की रोपाई का कार्य 1 जून के बाद ही शुरू किया जा सकेगा।
विकल्प के तौर पर 'मक्का' को प्राथमिकता
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ग्रीष्मकालीन धान की खेती से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए वैज्ञानिकों और कृषक संगठनों की सहमति से यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मुख्य जोर किसानों को धान के बजाय मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करना है।
"जनपद में ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में मक्का की फसल के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। मक्का के क्षेत्र विस्तार और इसकी सुचारू विपणन व्यवस्था सुनिश्चित होने से किसानों को कोई आर्थिक हानि नहीं होगी, बल्कि उनकी आय में सुधार होगा।"
— नितिन सिंह भदौरिया, जिलाधिकारी, ऊधम सिंह नगर
हाईकोर्ट के निर्णय का हवाला
उल्लेखनीय है कि कुछ कृषकों द्वारा ग्रीष्मकालीन धान बोने की अनुमति हेतु माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखंड में याचिका दायर की गई थी। हालांकि, न्यायालय ने 26 जून 2025 को अपने निर्णय के माध्यम से इन याचिकाओं का निस्तारण करते हुए प्रकरण को समाप्त कर दिया है। इसके बाद ही जिला प्रशासन ने भविष्य के लिए यह सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
यह आदेश मुख्य कृषि अधिकारी, समस्त उपजिलाधिकारियों और किसान संगठनों को पालनार्थ भेज दिया गया है। शाहनूर अली 151045804
