कुल की फातिहा के साथ उर्स का हुआ समापन, अकीदत और भाईचारे का लगा विशाल मेला
पीलीभीत जनपद की पूरनपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक गांव गहलुइया में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सूफी संत हज़रत मस्तान शाह मियां रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स बड़े ही अकीदत, श्रद्धा और शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। उर्स के मौके पर उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और आसपास के जिलों से हज़ारों की संख्या में जायरीन दरगाह शरीफ पर पहुंचे और चादरपोशी कर मन्नतें मांगीं।
उर्स की शुरुआत कुरआन-ख्वानी और फातिहा से हुई। पूरे कार्यक्रम के दौरान दरगाह परिसर या अल्लाह और या मस्तान शाह मियां के नारों से गूंजता रहा। जायरीन ने दरगाह पर माथा टेककर देश में अमन-चैन, भाईचारा और खुशहाली की दुआ मांग
हज़रत मस्तान शाह मियां को इलाके में एक बड़े सूफी फकीर और अल्लाह के नेक बंदे के रूप में याद किया जाता है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत, प्रेम और सेवा के रास्ते पर चलते हुए गुजारी। उर्स के अवसर पर उनके जीवन और शिक्षाओं को याद किया गया। उलेमा और सज्जादानशीनों ने अपने बयान में कहा कि सूफी संतों ने हमेशा मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत का पैगाम दिया है।
उर्स के दौरान रात में कव्वाली और नात-ए-पाक का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किया। कव्वाली के दौरान जायरीन झूमते नजर आए और माहौल पूरी तरह से रूहानी बन गया। अल्लाह और रसूल की शान में पढ़ी गई नातों ने लोगों के दिलों को छू लिया।
उर्स का समापन कुल की रस्म के साथ किया गया। कुल में भारी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। सज्जादानशीन और उलेमा-ए-किराम ने फातिहा पढ़कर सभी के लिए दुआ की। कुल के बाद तबर्रुक तकसीम किया गया, जिसे जायरीन बड़े अदब और एहतराम के साथ लेते नजर आए।
अकीदतमंदों के लिए लगा मेला
उर्स के मौके पर दरगाह के आसपास मेले जैसा माहौल देखने को मिला। दूर-दराज से आए जायरीन के लिए खाने-पीने, खिलौनों, कपड़ों और घरेलू सामान की अस्थायी दुकानें सजी रहीं। बच्चों में झूले और खिलौनों को लेकर खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह मेला रोजगार का जरिया बना
उर्स के दौरान लंगर का विशेष इंतजाम किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। आयोजन से जुड़े स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से जायरीन की देखभाल की। पानी, चिकित्सा और साफ-सफाई की व्यवस्था भी की गई, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था न होभीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ ट्रैफिक व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि उर्स शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।उर्स के दौरान सबसे खास बात यह रही कि इसमें हर वर्ग और हर मजहब के लोग शामिल हुए। हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदायों के लोगों ने भी दरगाह पर पहुंचकर श्रद्धा अर्पित की। यह उर्स गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आया।गांव गहलुइया के लोगों में उर्स को लेकर खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि उर्स के दिनों में पूरा गांव एक परिवार की तरह मिलकर आयोजन को सफल बनाता है। बुजुर्गों का कहना है कि हज़रत मस्तान शाह मियां की दरगाह से लोगों की मुरादें पूरी होती हैं, इसलिए हर साल जायरीन की संख्या बढ़ती जा रही है।उर्स के समापन पर आयोजन समिति की ओर से सभी जायरीन, प्रशासन, पुलिस और सेवा में जुटे स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया गया। समिति के सदस्यों ने कहा कि आगे भी उर्स को इसी तरह शांतिपूर्ण और भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। कुल मिलाकर, हज़रत मस्तान शाह मियां का उर्स न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह प्रेम, सद्भाव और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व भी साबित हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को अकीदत और रूहानियत के रंग में रंग दिया। रिपोट - जियाउल हक खान 151173981


