केलाखेड़ा। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न एवं एडिलेड में आयोजित विशाल सत्संग में भारत से एक माह के लिए गए स्वामी ध्यान प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि लोगों को भक्ति के मार्ग से जोड़ने से सकारात्मक सोच बढ़ती है तथा आध्यात्मक ज्ञान की बढ़ोतरी होती है।सत्संग में गूँजी भक्ति और सद्विचारों की धारा।
जानकारी के अनुसार श्री शिव विष्णु टेंपल मेलबर्न के हॉल में एक दिव्य और प्रेरणादायक सत्संग का सफल आयोजन श्री नंगली दरबार के भक्त जनों के द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस सत्संग का उद्देश्य लोगों को भक्ति के मार्ग से जोड़ना, जीवन में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करना था। सत्संग के दौरान श्री अद्वैत स्वरूप विचार आश्रम फतेहाबाद हरियाणा प्रांत भारत से आए हुए स्वामी ध्यान प्रेमानंद जी महाराज ने सरल शब्दों में भक्ति का महत्व समझाया और बताया कि किस प्रकार सच्ची भक्ति मनुष्य के जीवन में शांति, संतुलन और सदाचार लाती है। उपस्थित लोगों को अच्छे विचारों, मानव मूल्यों और आत्मिक उन्नति से जुड़े संदेश दिए गए, जिन्हें सभी ने बड़े ध्यान और श्रद्धा के साथ सुना। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सत्संग और भक्ति मन को स्थिर करने का एक सशक्त माध्यम हैं। सत्संग के माध्यम से लोगों को अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहकर प्रेम, करुणा और सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा मिली। श्रद्धालुओं ने बताया कि सत्संग से उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई। कई लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक वातावरण बनता है और नई पीढ़ी को सही दिशा मिलती है। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे सत्संग आयोजित करने की इच्छा जताई ताकि अधिक से अधिक लोग भक्ति और सद्विचारों से जुड़ सकें। यह सत्संग न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त प्रयास भी साबित हुआ। उधर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब से आए हुए श्री नंगली दरबार के श्रद्धालुओं ने ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में भी एक भव्य सत्संग का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी ध्यान प्रेमानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग विदेश में रहकर भी सनातन संस्कारों को धारण किए हुए हैं, जो बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति के अनुरूप आपस में सौहार्द, प्रेम, और सेवा का भाव बनाकर विचरण करना चाहिए, जिससे आपके सुंदर संस्कारों का प्रभाव अन्य लोगों को भी प्रभावित करे। सुंदर संस्कारों से मन निर्मल होता है और निर्मल मन से ही भगवान की भक्ति की जा सकती है जिससे मानव जीवन के उद्देश्य की पूर्ति होती है। सत्संग में आए हुए सभी श्रद्धालुओं के लिए मंगल कामना करते हुए, स्वामी जी ने उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन पर नृत्य करते हुए परमानंद की प्राप्ति की। यह आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव था, बल्कि यह एक अवसर भी था जहां वे अपने संस्कारों को साझा कर सकते हैं। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और शांति पाठ के साथ किया।इस मौके पर भारतीय प्रवासियों के अलावा विदेशी श्रद्धालुओं ने भी प्रतिभाग किया। विक्की सिंह 151127516

