फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी आगरा।जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें सबसे जरूरी है संस्थागत प्रसव को सुनिश्चित करना। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत आने वाले शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाई गई है। आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, स्टाफ नर्स और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से गर्भवती महिलाओं की भ्रांतियां दूर की गई हैं और उन्हें संस्थागत प्रसव करने के लिए प्रेरित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, अप्रैल से दिसंबर तक नाई की सराय, देहतोरा मोड, और रामनगर में डिलीवरी के आंकड़े में वृद्धि हुई है, जोकि सराहनीय है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऐसी स्वास्थ्य इकाइयों को चिन्हित किया गया जिनके द्वारा संस्थागत प्रसव गए थे। जिसमें तीन शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य नाई की सराय 20, देहतोरा मोड 37 और रामनगर 25 संस्थागत प्रसव कराए थे, जो कि जनसंख्या के अनुसार कम संस्थागत प्रसव थे । इस वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इन तीन यूपीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए कुशल रणनीति बनाकर कार्य करने के निर्देशित किया गया जिसके परिणामस्वरूप, अप्रैल से दिसंबर तक नाई की सराय 69, देहतोरा मोड 110 और रामनगर में 64 प्रसव कराए गए। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए आशा कार्यकर्ताओं का समय-समय पर क्षमतावर्धन भी किया जा रहा हैं।
राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि गोपाल ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना माताओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के लिये भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा चलाया जा रहा एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है। इसमें प्रसव एवं प्रसव उपरांत देखभाल हेतु नकद सहायता प्रदान की जाती है। शहरी क्षेत्र की गर्भवतियों को प्रसव के उपरांत एक हजार रुपए व ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवतियों को 1400 रुपए डीबीटी के माध्यम से खाते में भेजे जाते हैं।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नाई की सराय के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवांश उपाध्याय के नेतृत्व में संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़ाने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किए गए हैं, जिससे जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) एसएन मेडिकल कॉलेज जैसे रेफरल संस्थानों पर भार को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, स्टाफ नर्स के साथ बैठक की जिसमें प्रसव कम होने के कारणों पर चर्चा की। जिसमें जिला स्तरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर रेफर हो रहे उच्च जोखिम वाली गर्भवती, सीवियर एनीमिक गर्भवती कुछ कारण सामुदायिक स्तरीय भ्रांतियां की वजह से संस्थागत प्रसव नहीं करा रहा थीं। मैटरनल एनीमिया प्रबंधन के तहत समुदाय स्तरीय बैठकों में गर्भवती को आयरन की टेबलेट खाने और आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन लेने के लिए जागरूक किया । गर्भवती महिला के घर आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम संयुक्त गृह भ्रमण के दौरान गर्भवती के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी जन्म योजना, प्रसव पोटली, संस्थागत प्रसव के लाभ बताएं साथ ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस पर प्रसवपूर्व चार जांच करने और संस्थागत प्रसव करने लिए गर्भवती की काउंसलिंग की गई। ओपीडी के माध्यम से चिकित्सकीय सलाह और उपचार के माध्यम से 9 माह तक गर्भवती के साथ चिकित्सा और स्टाफ नर्स का समन्वय स्थापित करना सुनिश्चित किया समय-समय पर फॉलो भी किया गया । सभी के संयुक्त प्रयासों से गर्भवती महिलाओं का व्यवहार परिवर्तन हुआ और गर्भवती ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जारी सेवाओं को पूरे विश्वास के साथ अपनाया जिससे अप्रैल से दिसंबर तक 69 संस्थागत प्रसव किए जा चुके हैं l
देहतोरा मोड की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीक्षा ने बताया कि केंद्र पर सभी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था में सुधार किया गया तथा प्रसव कक्ष एवं लेबर रूम को सुदृढ़ किया गया। साथ ही गुणवत्तापूर्ण एएनसी (प्रसव पूर्व देखभाल) सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। सहयोगात्मक व्यवहार से गर्भवती महिलाओं में विश्वास बढ़ा है। उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं में आयरन सुक्रोज़ का प्रशासन व गंभीर एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं हेतु आवश्यक चिकित्सकीय उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर ही उपलब्ध कराया गया, जिससे जिला स्तरीय रेफरल में कमी आई।
रामनगर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत गोयल ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित मातृ बैठकें, महिला आरोग्य समिति बैठकों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से गर्भवती महिलाओं व उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के लाभों के प्रति जागरूक किया गया।शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नाई की सराय के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र शाहनगर की 25 वर्षीय निवासी नरगिस बताती है कि मेरा दूसरा बच्चा है पहला बच्चा मेरा घर पर ही हुआ था। आशा कार्यकर्ता शमा परवीन द्वारा मुझे लगातार समझाया गया समझाया गया था कि बच्चों को जन्म देने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पर जाना लेकिन मेरे आस-पास के लोगों ने मुझे बताया कि अस्पताल जाओगी तो चीरा लगा दिया जाएगा, स्टाफ अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं। मेरा पहला बच्चा था मैं डर गई और इसलिए मैं आशा दीदी से बहाने करती रही, घर पर ही मैंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया मुझे बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा। जब मैं दूसरी बार गर्भवती हुई तो आशा कार्यकर्ता ने मुझे और मेरे परिवार को अच्छी तरह से समझाया और स्वास्थ्य केंद्र पर बुलाया जहां मेरा पंजीकरण हुआ। लैब टेक्नीशियन लव कुश यादव द्वारा मेरी जांच की गई। मेरी जांच रिपोर्ट में खून की कमी निकाली मुझे डॉ. शिवांश उपाध्याय और स्टाफ नर्स प्रियंका शर्मा द्वारा बहुत अच्छे से समझाया गया। डॉक्टर साहब ने मुझे बताया कि आपको आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन दिया जाएगा जिससे आपकी खून की कमी दूर हो जाएगी साथ ही आपको अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना है स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ का व्यवहार बहुत अच्छा है । मैंने अपना डिलीवरी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नाई की सराय पर ही कराया मुझे कोई भी परेशानी नहीं हुई स्टाफ का व्यवहार बहुत अच्छा है प्रियंका में मैडम बहुत अच्छे से व्यवहार करती हैं और सभी बातों का ध्यान रखती हैं सभी को अस्पताल में ही पर सब करना चाहिए।
