उत्तराखंड उधम सिंह नगर गदरपुर ,
श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चार पुत्रों बाबा अजीत सिंह, जुझार सिंह ,जोरावर सिंह, फतेह सिंह एवं माता गुजरी कौर के अलावा अन्य शहीदों की याद में महान शहीदी गुरमत समागम का आयोजन करते हुए सर्वत्र सुख समृद्धि की कामना की गई। राष्ट्रीय राजमार्ग 74 बायपास पर ग्राम मोतियापुर चौक पर आयोजित शहीदी कार्यक्रम में ग्राम मोतियापुर,बलखेड़ा, चुन्न पुरी और बलखेड़ा नहर के ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं द्वारा आयोजित किए गए शहीदी समागम में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के उपरांत श्री सुखमनी साहिब की पाठ से आरंभता की गई। तत्पश्चात गुरुद्वारा नानकपुरी टांडा से आए भाई नाजर सिंह द्वारा शबद कीर्तन तथा गुरुद्वारा सिंह सभा बरखेड़ी काशीपुर से पहुंचे भाई मनजीत सिंह के जत्थे ने गुर इतिहास एवं शहीदों की दास्तान का वर्णन किया । वहीं कथावाचक देवेंद्र सिंघ द्वारा चार साहिब जादों की लासानी शहादत पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शो पर चलने का आह्वान किया । वहीं लगभग एक दर्जन बच्चों द्वारा भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कविता एवं शब्द कीर्तन गायन किया जिसका संगत ने बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जयकारे के साथ उत्साह वर्धन किया । इस दौरान ग्रंथी भाई प्रेम सिंह द्वारा सर्वत्र सुख शांति की अरदास की गई, कार्यक्रम में पहुंचे गुरुद्वारा नानकसर ठाठ बाजपुर के बाबा प्रताप सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए सभी को गुरु वाले बनने का आह्वान किया । वही ग्राम बिजपुर में शहीदी समागम में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सहज पाठ के भोग के उपरांत रागी भाई अमरजीत सिंह एवं रागी परमजीत सिंह ने शब्द कीर्तन तथा कथावाचक देवेंद्र सिंघ ने शहीदों की दास्तान का वर्णन तथा भाई अमरजीत सिंह ने सुख शांति की अरदास की । इधर,ग्राम बिशनपुर में आयोजित किए गए शहीदी समागम में गुरबाणी पाठ के उपरांत भाई सतनाम सिंह ने अरदास करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान कथा वाचक देवेंद्र सिंघ द्वारा गुरु तेग बहादुर, माता गुजरी जी ,बाबा अजीत सिंह, जुझार सिंह ,जोरावर सिंह ,फतेह सिंह के अलावा मोतीराम मेहरा और दीवान टोडरमल एवं अन्य शहीदों की शहादत का वर्णन करते हुए उन्हें नमन किया । कार्यक्रम के समापन के उपरांत अरदास एवं दूध के प्रसाद का वितरण किया गया। गुरुद्वारा सिंह सभा गदरपुर एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 74 प्रेम नगर बाईपास पर साहिबज़ादे चौक पर शहीदी समागम का आयोजन किया गया। विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के गुरुद्वारों में भी शहीदी समागमों का आयोजन करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ गुरु के लंगर एवं दूध के प्रसाद का वितरण किया गया ।
