10 लाख से ज्यादा अफगान शरणार्थियों के 2025 में अपने देश लौटने के बावजूद, बीस लाख से अधिक अफगान शरणार्थी अभी भी पाकिस्तान में रह रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के आंकड़ों के हवाले से ये दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ नवंबर महीने में 171,055 अफगान नागरिक अफगानिस्तान लौट गए, जिनमें से 37,899 को चमन, तोरखम और बरबचा सीमाओं के रास्ते निर्वासित किया गया। इसके अलावा नवंबर में यूएनएचसीआर के प्रत्यावर्तन केंद्रों के जरिये 31,500 से ज्यादा अफगान पंजीकरण प्रमाण पत्र (पीओआर) धारकों को अफगानिस्तान भेजा गया।
यूएन के अभियानों में आ रही दिक्कत
नवंबर में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़े तनाव ने मानवीय अभियानों को बाधित किया था। इसके चलते सीमा पार आवाजाही को प्रतिबंधित किया गया और चमन सीमा क्षेत्र से संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित होना पड़ा। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में अवैध विदेशियों की प्रत्यावर्तन योजना (आईएफआरपी) के तीसरे चरण के बावजूद यूएनएचसीआर और उसके साझेदारों ने यह सुनिश्चित किया कि जरूरी और जीवन रक्षक सेवाएं प्रदान की जाएं, जिनमें महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान और बच्चों के लिए स्थानों की बहाली, निरंतर कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता शामिल हैं। इसी बीच खैबर पख्तूनख्वा और अन्य जिलों में शरणार्थियों के स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को प्रांतीय अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया जारी रही। सरकार ने सितंबर 2023 में आईएफआरपी (IFRP) की शुरुआत की, जिसके कारण अफगानों की बड़े पैमाने पर वापसी हुई है।
अफगान शरणार्थियों के खिलाफ पाकिस्तानी सरकार की कार्रवाई तेज
इस योजना के पहले और दूसरे चरण को क्रमशः सितंबर 2023 और अप्रैल 2025 में लागू किया गया था। इसका लक्ष्य अवैध अफगान नागरिकों और अफगान नागरिकता कार्ड धारकों को लक्षित करना था। इन चरणों के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप जुलाई 2025 तक शहरी क्षेत्रों और शरणार्थी गांवों से 11 लाख से अधिक अफगान नागरिक वापस लौट आए। तीसरे चरण की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई, जिसमें पीओआर धारकों को लक्षित किया गया था और अब तक लगभग 166,000 पीओआर धारक वापस लौट चुके हैं। आईएफआरपी की शुरुआत से अब तक 18 लाख से अधिक अफगान अपने देश लौट चुके हैं। इस वर्ष नवंबर में 171,055 लोग अफगानिस्तान लौटे, जबकि 37,899 लोगों को निर्वासित किया गया। सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों के सभी 54 शरणार्थी गांवों को गैर-अधिसूचित कर दिया है और अफगानों से अफगानिस्तान लौटने का आग्रह करना जारी रखा है।
