भारत के आर्थिक परिदृश्य में बड़े बदलावों के संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि सरकार के सुधारों का सिलसिला थमने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आने वाले समय में सुधारों की यह प्रक्रिया और भी अधिक जोश और ताकत के साथ जारी रहेगी। सरकार का मुख्य फोकस 'ईज ऑफ लिविंग' यानी आम जनता के जीवन को आसान बनाने पर है। शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से साझा की गई सुधारों की उपलब्धियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने यह बात कही। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार टैक्स, लेबर और कॉर्पोरेट कानूनों में बड़े बदलावों को लागू कर चुकी है।
मिडिल क्लास को बड़ी राहतसरकार की ओर से जारी आंकड़ों और प्रधानमंत्री के वक्तव्य से साफ है कि 'इनकम टैक्स एक्ट 2025'का सबसे बड़ा लाभार्थी मध्यम वर्ग है। अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मध्यम वर्ग के परिवारों के हाथ में खर्च और निवेश के लिए अधिक पैसा बच रहा है। इससे अर्थव्यवस्था में खपत बढ़ रही है। नए टैक्स कानून ने कर प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया है, जिससे करदाताओं को कानूनी पचड़ों से मुक्ति मिली है।
छोटे उद्योगों के लिए खुली राहेंसरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापारिक जगत के बारे में कहा गया कि छोटे व्यवसायों को अब लाभ खोने के डर के बिना आगे बढ़ने की आजादी है। नई छोटी कंपनियों की परिभाषा का विस्तार किया गया है। अब 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले उद्यमों पर अनुपालन का बोझ कम कर दिया गया है। इससे MSMEs को अपना विस्तार करने, नई भर्तियां करने और लोकल एंटरप्राइजेज को ग्लोबल बनाने में मदद मिल रही है।
श्रम कानूनों में ऐतिहासिक बदलावकारोबारी धारणा (बिजनेस सेंटिमेंट) को सुधारने की दिशा में सरकार ने पुराने और जटिल कानूनों को खत्म किया है। 29 अलग-अलग श्रम कानूनों (Labour Laws) को मिलाकर अब केवल 4 लेबर कोड (Wages, Safety, Social Security, and Relations) बनाए गए हैं। इससे न केवल कंपनियों के लिए नियम मानना आसान हुआ है, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और महिलाओं के लिए मातृत्व सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया गया है।
जीएसटी सुधार और रिकॉर्ड तोड़ बिक्रीसरकार ने अपनी रिपोर्ट में जीएसटी को और सरल बनाने का दावा किया है। टैक्स स्लैब में सुधार और ऑटोमेटेड रिफंड प्रक्रिया ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा दिया है। इसका सीधा असर बाजार में भी दिख रहा है। सुधरती अर्थव्यवस्था का प्रमाण दिवाली के दौरान 6.05 ट्रिलियन रुपये की रिकॉर्ड बिक्री है। इस बार नवरात्रि के दौरान पिछले एक दशक में सबसे मजबूत खरीदारी दिखी।
ग्रामीण भारत और बुनियादी ढांचासुधारों का दायरा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण रोजगार अब केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थायी संपत्ति बनाने पर केंद्रित है। गांव के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आजीविका बेहतर हो रही है। प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट करता है कि सरकार का जोर जटिलताओं को खत्म कर परिणामों पर है। आने वाले दिनों में विवाद समाधान को और तेज करने और कानूनों को गैर-आपराधिक बनाने की दिशा में और बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।