राजस्थान अपनी तपती रेत, शाही किलों और रंगीली संस्कृति के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन इस रेगिस्तानी प्रदेश की पहचान सिर्फ धोरों और महलों तक सीमित नहीं है। यहां की धरती पर कुछ ऐसी अनोखी झीलें भी मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये झीलें न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक हैं, बल्कि इनके साथ जुड़ी कहानियां और धार्मिक महत्व भी इन्हें और खास बनाते हैं। इन झीलों में कहीं लोककथाओं की गूंज है, तो कहीं आस्था की शक्ति। राजस्थान की रेगिस्तानी झीलें इस बात का सबूत हैं
पुष्कर झील
पुष्कर झील धार्मिक महत्व रखती है, क्योंकि इसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। यह भगवान ब्रह्मा द्वारा निर्मित झील मानी जाती है और तीर्थराज के नाम से प्रसिद्ध है। यह झील 52 घाटों और 500 से अधिक मंदिरों से घिरी हुई है।
सांभर झील
यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है, जहां हजारों फ्लेमिंगो पक्षियों का डेरा लगता है। ये झील देश की सबसे बड़ी नमक निर्माण इकाइयों में से एक है। यहां पर्यटन प्रसिद्ध शाकम्भरी देवी मंदिर स्थित है।
गड़ीसर झील
जैसलमेर में स्थित गड़ीसर झील एक विशाल मानव निर्मित झील है जिसका निर्माण राजा रावल जैसल ने कराया था। यह अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है और इसमें नौ परस्पर जुड़ी झीलें शामिल हैं, जो इसे राजस्थान के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक बनाती हैं।
नक्की झील, माउंट आबू
माउंट आबू में अरावली की गोद में बसी यह झील लोककथाओं और रोमांस से जुड़ी हुई है। राजस्थान के एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू के प्रमुख पर्यटन स्थलों में नक्की झील का नाम शामिल है जो कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। हरी-भरी पहाड़ियों से घिरी इस झील की कई पौराणिक कथाएं हैं।
अना सागर झील, अजमेर
राजस्थान के अजमेर में अना सागर नाम की प्राचीन झील है जो अजमेर की शान मानी जाती है। इस झील से सूर्यास्त का नज़ारा हर दिल को मोह लेता है। यह एक ऐतिहासिक कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण 12वीं शताब्दी में पृथ्वीराज चौहान के दादा अरुणोराज ने कराया था।
बड़ा तालाब, बीकानेर
बीकानेर के प्रसिद्ध और पर्यटन स्ािल कोलायत में कपिल मुनि नाम की पवित्र झील या तालाब है। इस बड़ा तालाब भी कहा जाता है। यहां कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर कोलायत मेला आयोजित होता है। मेले के दौरान झील के 52 घाटों को सजाया जाता है। धार्मिक महत्व वाली यह झील कार्तिक मेले के समय हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।