अखिल भारत हिन्दू महासभा के प्रदेश संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार गोपाल चतुर्वेदी ने बांग्लादेश के मैमनसिंह में एक हिंदू युवक दीपु चंद्रदास की भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की और गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात कथित ईशनिंदा के आरोपों के बाद इस जघन्य घटना को अंजाम दिया गया। गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार दीपु चंद्र दास ने यह लिखा था कि “सभी भगवान अलग-अलग नामों से एक ही हैं।” इसे ईशनिंदा करार दिया गया और इसी कारण उसे जिंदा जला दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच अत्यंत खतरनाक है, क्योंकि यह भारत में धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को ही चुनौती देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली शक्तियाँ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग और विश्वभर के मानवाधिकार मंच इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन क्यों हैं। उन्होंने आगे कहा कि निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लिमा नसरीन ने सार्वजनिक रूप से बताया है कि दीपु चंद्र दास पर झूठा ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था और पुलिस संरक्षण में होने के बावजूद उसे छोड़ दिया गया। गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि यह बांग्लादेश में कानून के शासन के पूर्ण और जानबूझकर हुए पतन तथा राज्य की गंभीर जिम्मेदारी से पलायन को दर्शाता है। गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि बांग्लादेश इस समय अनिश्चितता, अराजकता और कानूनविहीनता के गंभीर दौर से गुजर रहा है। इस भयावह वातावरण में कट्टरपंथी और उग्रवादी तत्वों ने हिंदुओं, सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बेलगाम हिंसा शुरू कर दी है। एक हिंदू युवक की यह अमानवीय हत्या कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती असुरक्षा, भय और व्यवस्थित उत्पीड़न का भयावह प्रतिबिंब है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह स्थिति पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का यह नैतिक और मानवीय दायित्व है कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए। गोपाल चतुर्वेदी ने आगे कहा कि ऐसे हालात में भारत मूक दर्शक बना नहीं रह सकता और न ही रहना चाहिए। भारत की परंपरा रही है कि वह दुनिया भर में उत्पीड़ित और पीड़ित समुदायों के साथ खड़ा रहा है। विश्व हिंदू परिषद भारत सरकार से आग्रह करती है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सभी संभव कूटनीतिक, राजनीतिक और मानवीय उपाय करे। उन्होंने स्पष्ट रूप से मुहम्मद यूनुस को प्रदान किए गए नोबेल शांति पुरस्कार को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो नेतृत्व अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहता है, उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता या वैधता का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने इस बात की भी कड़ी निंदा की कि मुहम्मद यूनुस ने शरीफ उस्मान हादी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार दिया, जिसने पहले फेसबुक पर तथाकथित “ग्रेटर बांग्लादेश” का मानचित्र साझा कर भारत को खुली चुनौती दी थी—जिसमें भारत के सात पूर्वोत्तर राज्य, पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कुछ हिस्से शामिल दिखाए गए थे। अखिल भारत हिन्दू महासभा को ऐसे तत्वों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है। गोपाल चतुर्वेदी ने घोषणा की कि अखिल भारत हिन्दू महासभा बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा के विरोध में तथा न्याय, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग को लेकर भारत के प्रत्येक प्रांत और जिले में देशव्यापी आंदोलन करेगी। अपने वक्तव्य के समापन पर गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि अखिल भारत हिन्दू महासभा की आशा है कि बांग्लादेश में शीघ्र ही लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्ष मूल्य और कानून का शासन बहाल होगा। बांग्लादेश की जनता शांति, मानवाधिकार और निर्बाध आर्थिक प्रगति की हकदार है। भारत का समाज और सरकार बांग्लादेश में सौहार्द, सुरक्षा और न्याय की बहाली के लिए सभी न्यायसंगत, वैधानिक और मानवीय प्रयासों का समर्थन करती रहेगी। नन्द किशोर शर्मा 151170853
