बेरोजगारी से जूझ रहे देश के पढ़े-लिखे नौजवानों को चिटफंड कंपनियां आसानी से अपने जाल में फंसा रही हैं। नौकरी के अभाव में युवा इन कंपनियों के एजेंट बन जाते हैं और लोगों का पैसा निवेश कराते हैं। लेकिन जब कंपनी अचानक बंद हो जाती है, तो सबसे पहले एजेंटों पर ही दबाव बढ़ता है। कई मामलों में एजेंटों को मारपीट, गाड़ी छीनने और जान से मारने तक की धमकियां मिलती हैं। एजेंटों का कहना है कि वे भी पीड़ित हैं, क्योंकि असली जिम्मेदार वे कंपनियां हैं जो लालच देकर जनता का पैसा इकट्ठा करती हैं। वहीं जनता भी सरकारी योजनाओं की सुविधा होते हुए निजी कंपनियों के लालच में आकर निवेश कर देती है, और नुकसान होने पर पूरा गुस्सा एजेंटों पर उतारती है। एजेंटों ने शासन-प्रशासन से विशेष अपील की है कि सहारा इंडिया सहित अन्य चिटफंड कंपनियों में फंसा जनता का पैसा जल्द वापस दिलाया जाए, ताकि उनका भय और तनाव कम हो सके। देखे ग्वालियर से राजेश शिवहरे की खास रिपोर्ट
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