फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया यूपी कासगंज। शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मामों में नशे में धुत एक पिता अपने ही कलेजे के टुकड़ों को मौत के मुंह में झोंकने वाला था, लेकिन गांव के सजग लोगों और पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई ने तीन मासूम बच्चियों की जान बचा ली। बता दे कि मंगलवार देर रात्रि गांव निवासी कौशल पुत्र सोनपाल ने डायल 112 पर सूचना दी कि बंटी नामक व्यक्ति शराब के नशे में अपनी तीन छोटी बच्चियों को भूखा-प्यासा और बिना कपड़ों के छोड़कर प्रताड़ित कर रहा है। सूचना मिलते ही 112 पुलिस मौके पर पहुंची,तो दिल दहला देने वाला मंजर था। ठंड से कांपती, भूख से रोती तीन मासूम बच्चियां, जिनके शरीर पर पहनने तक को कपड़े नहीं थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 112 पुलिस ने तत्काल जिला अस्पताल चौकी पर तैनात आरक्षी अनिल कुमार और ग्राम पंचायत के प्रधान पति सुरेन्द्र सिंह को मौके पर बुलाया। तीनों मासूमों को सुरक्षित निकालते हुए उन्हें सहारा दिया गया। प्रधान पति सुरेन्द्र सिंह ने तुरंत 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी और अपनी ही गाड़ी से बच्चियों को चाइल्ड हेल्पलाइन कर्मचारी मयंक के साथ आवास विकास कॉलोनी स्थित कार्यालय पहुंचाया, जहां अब वे सुरक्षित हैं।वही एक ई-रिक्शा चालक की गवाही ने रोंगटे खड़े कर दिए। चालक के मुताबिक बंटी तीनों बच्चियों को लेकर बस से कासगंज आया और उसे नदरई तक ले चलने को कहा। रास्ते में नहर के पास अचानक वह बच्चियों को नहर में फेंकने लगा। मासूमों की चीखें सुनकर चालक दौड़ पड़ा, उन्हें बचाया और आसपास के लोगों को बुलाकर किसी तरह बंटी को गांव मामों तक पहुंचाया।
ग्रामीणों ने बताया कि बंटी पिछले तीन वर्षों से गांव मामों में झुग्गी डालकर रह रहा था। पत्नी लक्ष्मी मजदूरी कर बच्चों का पेट पालती थी, जबकि बंटी दिन-भर शराब में डूबा रहता था। करीब एक साल पहले उसने नशे में अपनी ही 13 वर्षीय बेटी के साथ घिनौनी हरकत की, जिसके बाद वह जेल भी गया। बदनामी और डर के चलते पत्नी अपनी बड़ी बेटी को लेकर गांव छोड़ गई। मां के जाने के बाद बंटी ने झोपड़ी में आग लगा दी और गांव छोड़कर चला गया। तीन छोटी बच्चियां और एक बेटा वहीं रह गए। बेटा भी अब लापता बताया जा रहा है। मंगलवार को बंटी अचानक वापस लौटा। लेकिन हाथ में उम्मीद नहीं, सिर्फ नशा और मासूमों के लिए मौत लेकर।इस पूरे घटनाक्रम में कौशल, दुष्यंत, आशीष और अन्य ग्रामीणों की सजगता और इंसानियत ने तीन मासूम जिंदगियों को बचा लिया। अगर कोई चुप रह जाता, तो शायद आज कहानी कुछ और होती।ग्रामीणों ने प्राासन से मांग की है कि तीनों बच्चियों को सिर्फ सुरक्षित नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन दिया जाए, उचित इलाज, शिक्षा और स्थायी संरक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि जिनके बचपन पर अंधेरा छा गया था, उनकी जिंदगी में अब उजाला भर सके। रिपोर्ट मोहित गुप्ता 151022222
