हरदोई में पिहानी चुंगी से खेतुई तक प्रस्तावित फोरलेन अभी धरातल पर नहीं उतरी है, लेकिन सियासत में इसकी दस्तक ज़ोरदार हो चुकी है। सड़क के नक्शे तैयार हैं, बजट की बात हो रही है, लेकिन सबसे तेज़ निर्माण श्रेय के दावों का हो रहा है। एक तरफ हैं प्रदेश सरकार के ताकतवर आबकारी एवं मद्य निषेध मंत्री नितिन अग्रवाल, तो दूसरी ओर हरदोई लोकसभा के सांसद जय प्रकाश रावत। दोनों माननीय नेता इस प्रस्तावित फोरलेन को लेकर खुद को इसकी स्वीकृति का असली सूत्रधार बता रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि अभी टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, लेकिन पोस्टर और पोस्ट पहले ही सजने लगे हैं।
नेताओं की होड़ इतनी तेज़ है कि जनता को लगने लगा है — कहीं सड़क बाद में बने और उद्घाटन पहले न हो जाए। कोई कह रहा है मेरे प्रयास से मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी, तो कोई कह रहा है हमारी निधि से DPR बनी है। ऐसा लग रहा है जैसे फोरलेन नहीं, बल्कि कोई चुनावी झंडा फहराने की तैयारी है।
इस सबके बीच सड़क किनारे बसे लोग, किसान जिनकी ज़मीन अधिग्रहण में जाएगी, और दुकानदार जिनकी दुकानें प्रभावित होंगी — वो अब तक सिर्फ तमाशबीन बने हैं। अभी तक किसी ने ये नहीं बताया कि जमीन का मुआवजा कब मिलेगा, निर्माण कब शुरू होगा और काम कितना समय लेगा।
नेताओं की राजनीति अपनी जगह है, पर आम आदमी अब भी इसी सवाल में उलझा है कि इस फोरलेन से सुविधा ज़्यादा मिलेगी या चुनावी भाषण? जनता की निगाहें वादों पर नहीं, मशीनों पर हैं। क्योंकि उन्हें पोस्टर नहीं, सड़क चाहिए। मंच नहीं, मुआवजा चाहिए।
यह पहला मौका नहीं जब सड़क से पहले श्रेय का संग्राम शुरू हुआ हो। लेकिन यह जरूर पहला मौका है जब सड़क की शुरुआत से पहले ही उसका राजनीतिक समर्पण कर दिया गया हो।
अब देखना ये है कि सड़क पहले बनती है या उसका शिलापट्ट। रिपोर्ट: सी वी आज़ाद 151127242
