फ़ास्ट न्यूज़ इंडिया
देश के कई हिस्सों में इन दिनों लिवर से संबंधित संक्रमण के मामले बढ़ने की खबर है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पिछले कुछ महीनों से हेपेटाइटिस बी और सी के मामले तेजी से बढ़े हैं। तीन महीने में अकेले बुलंदशहर में हेपेटाइटिस बी और सी के 288 मरीज रिपोर्ट किए गए हैं। जनवरी से मार्च तक हेपेटाइटिस बी के 174 व हेपेटाइटिस सी के 413 लोगों के वायरल लोड की जांच की गई। इसमें हेपेटाइटिस बी के 97 और सी के 191 लोगों का वायरल लोड पॉजिटिव मिला है। लिवर को प्रभावित करने वाला ये संक्रमण गंभीर रोगों का भी कारण बन सकता है। हेपेटाइटिस अगर लंबे समय तक बनी रहे और इसपर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण कैंसर होने का भी जोखिम बढ़ जाता है। पांच वर्षों में हेपेटाइटिस-बी से मौत के बढ़े मामले भारत में पिछले पांच वर्षों में हेपेटाइटिस बी के कारण 2,700 से अधिक मौतें हुई हैं। 2024 में 607 लोगों की इससे जान गई। सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र (124) में हुईं। 18 मार्च को राज्यसभा में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में देश में संक्रमण से मौत के मामले बढ़े हैं। साल 2019-20 में 173 मौतें हुईं, वहीं 2020-21 में यह संख्या घटकर 139 हो गई थी। हालांकि, 2021-22 में हेपेटाइटिस-बी से संबंधित मौतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई और 323 से अधिक लोगों ने इसकी चपेट में आकर जान गंवा दी। 2023-24 में 972 और 2025 में 607 मौतें रिपोर्ट की गईं।
हेपेटाइटिस-बी के कारण सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र (124), गुजरात (95), पश्चिम बंगाल (80), उत्तर प्रदेश (79), मध्य प्रदेश (72), राजस्थान (64) में हुई हैं।
हेपेटाइटिस से लिवर को होता है नुकसान
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने हेपेटाइटिस सी, ए और ई के लिए निदान और उपचार के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में 2018 में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) शुरू किया था। इससे और बढ़ाया जा रहा है। हेपेटाइटिस बी और सी दोनों वायरस से होने वाली लिवर की बीमारियां हैं, लेकिन इनके वायरस अलग हैं और फैलने का तरीका भी थोड़ा अलग है।
हेपेटाइटिस-बी हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) के कारण होने वाला लिवर संक्रमण है। ज्यादातर लोगों में हेपेटाइटिस बी अल्पकालिक होता है। हालांकि अगर ये संक्रमण 6 महीने से अधिक समय तक बना रहता है यानी क्रॉनिक हेपेटाइटिस-बी के कारण लिवर फेलियर, लिवर कैंसर और लिवर सिरोसिस जैसी समस्याओं का जोखिम हो सकता है।
हेपेटाइटिस बी के बारे में जानिए
हेपेटाइटिस बी का संक्रमण रक्त, वीर्य या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह छींकने या खांसने से नहीं फैलता है। इसके अलावा संक्रमित गर्भवती महिलाओं से प्रसव के दौरान शिशुओं को भी संक्रमण हो सकता है।
इस संक्रमण के कारण थकान, पीलिया (स्किन/आंखों का पीला होना), पेट दर्द, उल्टी, गहरे रंग का पेशाब होने की दिक्कत देखी जाती है। इस संक्रमण से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं। नवजात या टीकाकरण से छूट गए बच्चों को इसका वैक्सीन जरूर लगवाना चाहिए।
हेपेटाइटिस सी का खतरा
हेपेटाइटिस बी की ही तरह हेपेटाइटिस सी का संक्रमण भी लिवर में सूजन और क्षति का कारण बनता है, और इसका इलाज एंटीवायरल दवाओं से किया जा सकता है। जब वायरस युक्त रक्त आपके शरीर में प्रवेश कर जाए तो इससे संक्रमण होने का खतरा रहता है। इसके लक्षण बहुत अधिक स्पष्ट नहीं हो पाते हैं यही कारण है कि समय पर इसका पता लगाना कठिन हो सकता है। इस संक्रमण के कारण पीलिया, थकान, मतली, बुखार और मांसपेशियों में दर्द जैसी दिक्कत होती है। हेपेटाइटिस सी से बचाव के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है।
