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*जयपुर:* हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का महत्व है। हर माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना और व्रत किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से साधक को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीश व्यास ने बताया कि इस वर्ष माघ पूर्णिमा 11 फरवरी की शाम 6:55 मिनट से शुरू होकर 12 फरवरी की शाम 7:22 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा 12 फरवरी को है। माघ पूर्णिमा योग पर बनने वाले सौभाग्य योग, शोभन योग, शिववास, गजकेसरी योग, त्रिग्रही योग। धर्म ग्रंथों में इस दिन को स्नान-दान का महापर्व कहा गया है। साथ ही पूरे साल के पूर्णिमा स्नान में माघ पूर्णिमा स्नान को सबसे उत्तम भी कहा गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा पर तीर्थ के जल में भगवान विष्णु का निवास होता है। साथ ही इस दिन तिल दान करने से एक साथ कई यज्ञ करने से पुण्य फल मिलता है।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि पुराण के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन जो भी अलौकिक गंगा स्नान करते हैं। उनके बाद जप और दान करते हैं उन्हें पवित्र बंधनों से मुक्ति मिलती है। ग्रंथों में माघ को भगवान भास्कर और श्रीहरि विष्णु का माह बताया गया है। रविवार को सूर्यास्त के साथ ही तीर्थस्थल पर नदियों में स्नान करेंगे। माघ पूर्णिमा पर चंद्रमा और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही माघ पूर्णिमा की रात चंद्रोदय के समय चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र दोष दूर होता है।
*माघ पूर्णिमा:*
ज्योतिषाचार्य डा. अनीश व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि 11 फरवरी को शाम 06:55 मिनट पर शुरू होगी और 12 फरवरी को शाम 07:22 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
*शुभ योग:*
ज्योतिषाचार्य डा. अनीश व्यास ने बताया कि माघ महीने की पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। 12 फरवरी को कुम्भ संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव कुंभ राशि में परिवर्तन करेंगे। संक्रांति तिथि पर गंगा स्नान किया जाता है। माघ महीने में इस तिथि को बहुत ही खास मानी जाती है और इस दिन कई ज्योतिष उपाय भी किए जाते हैं जिससे हमेशा खुशियां बनी रहती हैं। इस पूर्णिमा को 'ब्रह्म पूर्णिमा' भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करना और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। माघ पूर्णिमा पर बनने वाले कुछ शुभ योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, शिववास योग, गजकेसरी योग, त्रिग्रही योग।
*स्नान-दान का महापर्व:*
ज्योतिषाचार्य डा. अनीश व्यास ने बताया कि मकर संक्रांति की तरह इस दिन भी तिल दान का विशेष महत्व होता है, माघ पूर्णिमा गंगा-यमुना के किनारे संगम पर चल रहे कल्पवास का आखिरी दिन होता है। इस दिन पूरे महीने की तपस्या के बाद शाही स्नान के साथ कल्पवास समाप्त हो जाता है। माघ पूर्णिमा से धार्मिक दृष्टि का विशेष महत्व है। स्नान-दान की सभी तिथियों को यह महापर्व कहा जाता है। इस पर्व में यज्ञ, तप और दान का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा, पितरों का श्राद्ध और लोगों को दान करने का विशेष फल होता है। भोज्य पदार्थ, वस्त्र, तिल, कंबल, गुड़, प्याज, घी, ओलध, फल, अन्न, पादुका आदि का दान करना चाहिए।
*सूर्य और चन्द्र पूजा:*
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेशक दा. अनीश व्यास ने बताया कि यह पर्व माघ महीने का आखिरी दिन होता है। माघ में सूर्य पूजा से रोग और दोष दूर होते हैं। इसलिए इस माह के समाप्त होने का समय प्रातः काल अशुभ भगवान सूर्य को जल चढ़ाया जाता है। उत्तरायण के इस दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से बुढ़ापा होता है और बीमारियां खत्म हो जाती हैं। इस दिन स्नान के बाद ऊँ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। ग्रंथों में बताया गया है कि पूर्णिमा पर चंद्रमा को पितरों तक अर्घ्य दिया जाता है। पितृ वंश होते हैं. माघ मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा अपने मित्र सूर्य की राशि में रहता है। इसका प्रभाव बढ़ेगा। नीरोगी रहने के लिए इस दिन औषधियों को चंद्रमा की रोशनी में अगले दिन खाना चाहिए। ऐसा करने से शर्त में मिलती है राहत.
*ब्रह्मवैवर्त पुराण, पद्म और मत्स्य पुराण:*
भविष्यवक्ता दा. अनीश व्यास ने बताया कि माघी पूर्णिमा पर स्नान और दान का क्या महत्व है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन जो भी अलौकिक गंगा स्नान करते हैं। उनके बाद जप और दान करते हैं उन्हें पवित्र बंधनों से मुक्ति मिलती है। ग्रंथों में माघ को भगवान भास्कर और श्रीहरि विष्णु का माह बताया गया है। रविवार को सूर्योदय के साथ ही तीर्थस्थल पर नदियों में स्नान करेंगे। पद्म पुराण के अनुसार माघ मास के दौरान व्रत, दान और तपस्या न भी कर सकते हैं तो इस महीने के आखिरी दिन यानी पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले तीन नदियों के संगम में स्नान से अक्षय पुण्य मिलता है। ऐसा नहीं कर सकते तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे और चुटकी भर तिल स्नानघर से भी तीर्थ स्नान करने से पूरा पुण्य मिलता है। मत्स्य पुराण में कहा गया है कि इस दिन ब्रह्मवैवर्त पुराण का दान करने से ब्रह्म लोक का दर्शन होता है। ऐसा ही है ये पुण्य देने वाला पर्व.
*तीर्थ स्नान का फल:*
कुण्डली विश्लेशक डा. अनीश व्यास ने बताया कि माघ नक्षत्रों के नाम से माघ पूर्णिमा कैसे हुई थी। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्म नजरिया भी बहुत महत्वपूर्ण है। पूरे महीने अगर तीर्थ स्नान न कर सके तो माघ पूर्णिमा पर गंगा या पवित्र नदियों में स्नान अवश्य करना चाहिए। इससे पूरे माघ महीने में तीर्थ स्नान करने का पुण्य फल मिलता है। साथ ही भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की कृपा भी बनी रहती है।
*माघी पूर्णिमा पर शुभ काम:*
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषण दा. अनीश व्यास ने बताया कि माघ पूर्णिमा पर विष्णु पूजा के साथ कुंडली दोषों का असर पूरे परिवार पर पड़ता है। विष्णु जी की कृपा से काम में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं, सफलता मिलती है और घर-परिवार में प्रेम बना रहता है। पूर्णिमा पर पवित्र ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। जैसे श्रीरामचरित मानस, श्रीमद्भागवत कथा, विष्णु पुराण, शिव पुराण आदि। ग्रंथों के पाठ के साथ ही अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप भी करना चाहिए। विष्णु पूजा में तिल से बनी मिठाई का भोग जरूर लगाएं। विदेशी लोगों को तिल का दान भी करें। इस दिन हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा या सुंदर कांड का पाठ करें। आप यात्रा तो ऊँ श्रीरामदूताय नम: मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। मंत्र जप कम से कम 108 बार करना चाहिए। पूर्णिमा पर शिव का जलाभिषेक करें। बांस के लोटे में जल भरें और ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए प्लास्टिक धार से शिवलिंग पर चढ़ाएं। शिव पूजा करें.
