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यूपी में बिजली संग्राम बत्ती गुल और बढ़ेगा हड़ताल जाने क्यों हड़ताल पर है कर्मचारी।
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ऊर्जा मंत्री की चेतावनी- बात नहीं मानने वाले बर्खास्त होंगे:बिजली कर्मचारी नेता का पलटवार- शोषण किया तो जेल भरो आंदोलन होगा

यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है वो किसी भी सूरत में हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। कर्मचारियों के शोषण पर हड़ताल अनिश्चितकालीन में तब्दील हो जाएगी और जेल भरो आंदोलन शुरू होग

इससे पहले ऊर्जा मंत्री डॉ. एके शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कहा, ''बिजली आपूर्ति सामान्य है। 1332 संविदा कर्मियों को पिछले 24 घंटों में बर्खास्त किया गया है। बात नहीं मानने वालों को भी बर्खास्त किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो हजारों की सेवा समाप्त करेंगे।'' इसके कुछ देर बाद ही ऊर्जा मंत्री ने विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति को बातचीत के लिए आवास पर बुलाकर मंत्री समिति के पदाधिकारियों से बातचीत की लेकिन कोई बात नही बनी।

वहीं, देर शाम यूपीपीसीएल के एमडी पीसीएल ने हड़ताल करने वाले 6 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। जिनमे कर्मचारियों के नाम जय प्रकाश, प्रभात, सीवी उपाध्याय, जीवी पटेल, जितेन्द्र सिंह गुर्जर और वसीम अहमद है। इन पर कर्मचारियों को हड़ताल के लिए उकसाने का आरोप है। इसके अलावा पावर कारपोरेशन के फील हॉस्टल पर जहां धरना चल रहा है, वहां पर पुलिस फोर्स बढ़ा दी गई है।

विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा, सबसे पहले इसे पढ़ते हैं..

'ऊर्जा निगम नशे के मद में चूर है'

विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा, ''हम भगोड़े नहीं हैं। हम कहीं नहीं जा रहे हैं। पुलिस हमें गिरफ्तार कर सकती है। जनता जो दंड देगी, हम तैयार हैं। ऊर्जा निगम नशे के मद में चूर है। हमने 16 फरवरी को नोटिस में 1 महीने का समय दिया था। जिनको वैकल्पिक व्यवस्था करनी थी, उनसे क्यों नहीं पूछा।''

'हमने कहीं हिंसा नहीं की'
शैलेंद्र ने कहा, ''ऊर्जा मंत्री ने कहा वार्ता के दरवाजे खुले हुए हैं। मैंने भी उनसे यही कहा कि हमारी तरफ से भी वार्ता के दरवाजे खुले हुए हैं। लेकिन मैं अत्यंत दुख के साथ कह सकता हूं कि हमें वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया। हम पर आरोप लगा कि हमने तोड़फोड़ की है। हमने कहीं हिंसा नहीं की। आपकी सरकार और जांच एजेंसी है। बिना जांच के हम पर आरोप लगा दिया।''

शैलेंद्र ने कहा, ''ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश की संपत्ति के साथ कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं इस आरोप को नकार रहा हूं, क्योंकि ऊर्जा विभाग हमारी जननी है। यहीं से हम रोजगार पाते हैं और अपना पेट पालते हैं। इतिहास में पहली बार हो रहा है कि ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते को ऊर्जा के MD मनाने को इनकार कर रहे हैं।''

एक-एक करके इकाइयां बन्द हो गईं
शैलेंद्र ने कहा, ''एक-एक करके इकाइयां बन्द हो गई हैं। आउटसोर्सिंग कर्मचारी जो बेहद गरीब हैं, जो किसी नौकरी से अपना परिवार पालते हैं, उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद कहा गया कि निकालने के बाद नौजवानों को रोजगार दिया जाएगा। ऐसे कर्मचारी जो कम वेतन में अपनी जान देने को तैयार रहता है। ऐसे ऊर्जा कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। हम समान मानदेय की बात कर रहे हैं।''

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने क्या कहा, अब इसे पढ़िए..

'हम हड़ताल खत्म करने के लिए कह रहे'
यूपी में बिजली कर्मचारियों के हड़ताल के दूसरे दिन सीएम ने आपात बैठक बुलाई। इसमें ऊर्जा मंत्री, बिजली विभाग के अफसर और पुलिस अधिकारियों शामिल हुए। इसके बाद ऊर्जा मंत्री डॉ. एके शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कहा, ''बिजली आपूर्ति सामान्य है। हाईकोर्ट ने नोटिस दिया कि ये जनता को परेशान करने वाली हड़ताल है। अगेंस्ट नेशनल इंटरेस्ट है। अवमानना का नोटिस भेजा गया है। हमारी प्रबंधन की तरफ से सभी सदस्यों को हाईकोर्ट के ऑर्डर की प्रति भेजी गई है। आवश्यक सेवा को बाधित करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि 22 कर्मचारियों पर एस्मा के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्हें जेल भेजा जाएगा।''

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि हड़ताल को खत्म करने के लिए कहा गया। घाटे के बावजूद बोनस देना संभव नहीं है। ऐसी मांग करना सही नहीं है। कानून को हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई होगी। बिजली के मुद्दे पर जनता ने सहयोग किया है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सोशल मीडिया पर हड़ताल की अपील की जा रही है। ऐसे संदेश प्रचारित किए जा रहे हैं। ये राष्ट्रीय संपत्ति है। किसी की निजी संपत्ति नहीं है।"

'आकाश में हो या पाताल में, हम खोजकर कार्रवाई करेंगे'
उन्होंने कहा, "यूपी 28000 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है। मौसम के चलते मांग आधी है। तमाम बिजली संगठन हड़ताल से अलग हैं। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्थित है। जिन संगठन के कर्मचारी बाधा पैदा कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से हटाया जा रहा है। चाहे कोई जन्म स्थान में हो, जंगल में हो, नदी में हो, आकाश में हो या पाताल में।

हम खोज कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हाईकोर्ट ने गंभीरता से हड़ताल पर रोक लगाने की बात कही है। लेकिन अभी भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के लोग मान नहीं रहे हैं। दुर्भाग्य का विषय है। उच्च न्यायालय ने अवमानना का नोटिस दे दिया है।''

अभी विभाग पर एक लाख करोड़ का घाटा'
ऊर्जा मंत्री ने कहा, "कुछ लोगों ने कानून अपने हाथ में लिया था। ऐसे लोगो को चिह्नित कर के कार्रवाई की जा रही है। हम हमेशा बातचीत के लिए तैयार हैं। बिजली विभाग अभी तक एक लाख करोड़ का घाटा चल रहा है। 80 हजार करोड़ का बैंक का लोन चल रहा है। 5 साल से बोनस नहीं दिया गया।"

30 लाख से ज्यादा लोग बिजली कटौती से परेशान सरकारी दावों के साथ अगर मौजूदा हालात की बात करें तो पूर्वांचल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल और मध्यांचल समेत केस्को और नोएडा पावर कंपनी में कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब बढ़ रहा है। प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं, जहां 80% बिजली आपूर्ति बाधित हो चुकी है। वजह है फॉल्ट को ठीक नहीं किया जा रहा है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, आगरा और बरेली समेत कई शहरों में पहले दिन ही जबरदस्त संकट पैदा हो गया।

सरकार ने हड़ताल से निपटने के लिए आउटसोर्सिंग और संविदा पर प्रदेशभर में तैनात करीब 1332 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी। फिर भी कर्मचारी हड़ताल पर अड़े हैं। गुरुवार रात 10 बजे से शुरू हुई 72 घंटे की हड़ताल के शुरुआती 40 घंटे में प्रदेशभर में करीब 30 लाख से ज्यादा कस्टमर बिजली कटौती से परेशान रहे हैं।

 

सरकार से लेकर प्रशासन सप्लाई ठीक रखने के लिए जोर लगाए है, लेकिन कर्मचारियों के बिना यह मुश्किल हो रहा है। उधर, लगातार कटौती से लोगों का सब्र का बांध टूट रहा है। बिजली सप्लाई बाधित होने से औद्योगिक शहरों कानपुर, गोरखपुर जैसे शहरों में फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं। लखनऊ के भी बड़े इलाके में भी बिजली संकट है। लोग बिजली सब-स्टेशन पहुंचकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कुशीनगर, बलिया, देवरिया, गोरखपुर और प्रतापगढ़ में 242 संविदा कर्मचारियों को बाहर कर दिया है।

शैलेंद्र दुबे समेत अन्य नेताओं के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी

उधर, हड़ताल का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंच गया। विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे समेत अन्य नेताओं के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद सोमवार को सभी पदाधिकारियों को हाईकोर्ट ने तलब किया है।

कर्मचारियों के मोबाइल बंद, ऑफिस पर PAC तैनात
बिजली विभाग की इस हड़ताल में करीब एक लाख कर्मचारी हैं। इनमें 20 से ज्यादा कर्मचारी नेताओं को हिरासत में लिया गया है। किसी प्रकार का हंगामा न हो। इसलिए लखनऊ समेत कई जिलों में बिजली विभाग के ऑफिस पर PAC तैनात कर दी गई है। गिरफ्तारी से बचने से सभी प्रमुख नेता, अधिकारी और कर्मचारियों ने अपना मोबाइल नंबर बंद कर लिया है।

अब आपको कुछ शहरों का हाल बताते हैं...

कन्नौज में किसानों ने बिजली घर का किया घेराव

कन्नौज में लगातार दूसरे दिन बिजली ठप रहने पर किसान भड़क गए। उन्होंने बिजली घर का घेराव किया। किसानों की भीड़ को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। पीएसी भी बुलाई गई।

लखनऊ में हंगामा, प्रयागराज में हाईवे जाम
लखनऊ के हुसैनगंज में बिजली कटौती से परेशान लोगों ने शुक्रवार देर रात बिजली केंद्र पर पहुंचकर हंगामा किया। पुलिस ने लोगों को समझाकर वहां से वापस घर भेजा। प्रयागराज, सिद्वार्थनगर समेत कई जिलों में बिजली कटने से नाराज लोगों ने नेशनल हाईवे जाम करके प्रदर्शन किया।

औरैया में डीएम पीसी श्रीवास्तव बिधूना सब-स्टेशन पहुंचे और बिजली कर्मी को जमीन में गाड़ने की धमकी दे डाली। वहीं, महोबा डीएम मनोज कुमार ने हड़ताल में शामिल 12 संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। यहां 40 नए संविदा कर्मियों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।

रायबरेली में पावर स्टेशन में बैठे अफसर
तिलियाकोट का फीडर बंद हो गया। कर्मचारी थे नहीं, इसलिए जॉइंट मजिस्ट्रेट अंकिता जैन, सिटी मजिस्ट्रेट पल्लवी मिश्रा त्रिपुरा पावर स्टेशन पहुंच गईं। मगर, उन्हें कर्मचारियों का सहयोग नहीं मिला। मशक्कत के बाद फीडर शुरू कराया जा सका। उन्नाव में देर रात लोगों ने हंगामा किया। दरअसल, कुंदन रोड स्थित बिजली सब-स्टेशन से आपूर्ति रोकी गई थी। लोग वहां पहुंचे, तो सुनने वाला कोई नहीं। इससे नाराज लोगों ने कानपुर-उन्नाव हाईवे जाम करने का प्रयास किया। मगर, पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया।

अयोध्या में 40 जगहों पर हुए फॉल्ट
प्रयागराज में 48, कानपुर देहात में 9, सिद्धार्थनगर में 9, जालौन में 8, आजमगढ़ में 32, कुशीनगर में 20, रामपुर में 6, मऊ में 4, बहराइच में 20, बस्ती में 32 उपकेंद्र बंद हैं। अयोध्या में गुरुवार रात को 40 जगहों पर फॉल्ट हुए। इसमें सिर्फ 3 फॉल्टों को कर्मचारियों ने ठीक किया।

गाजियाबाद में 24 घंटे में 55 स्थानों पर आए फॉल्ट

गाजियाबाद में गुरुवार रात से शुक्रवार रात तक करीब 55 स्थानों पर फॉल्ट होने की सूचनाएं पॉवर कॉर्पोरेशन के पास आई हैं। वसुंधरा सेक्टर 11 में केबिल टूटने से कई घंटे सप्लाई बाधित रही। साहिबाबाद मेट्रो स्टेशन के पास भी केबल फॉल्ट से करीब 8 घंटे पॉवर कट रहा।

राजनगर एक्सटेंशन इलाके की कई सोसाइटी में बिजली सप्लाई में दिक्कत आ रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फॉल्ट ठीक करने के लिए GDA, नगर निगम समेत कई विभागों के 150 कर्मचारी अलग से तैनात किए हैं।

फतेहपुर में जेई सहित 4 पर केस, 19 संविदा कर्मी बर्खास्त

फतेहपुर में भी तीन दिन बाद भी बिजली समस्या से निजात न मिलने पर अब जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जेई सहित चार कर्मियों पर एस्मा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 19 संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है।

20 संगठन हड़ताल में शामिल
ऊर्जा मंत्री ने हड़ताल में शामिल होने वालों को कई बार चेतावनी दी, लेकिन उसका असर अभी तक हड़ताल में नहीं दिखा है। 20 संगठन अभी भी हड़ताल में शामिल हैं। मंत्री ने कहा था कि बिजली सप्लाई में बाधा डालने वाले कर्मचारियों को पाताल से खोजकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन, उससे सप्लाई बेहतर होती दिख नहीं रही है।

23 साल बाद हो रही हड़ताल
इससे पहले, साल 2000 में कर्मचारियों ने बिजली विभाग के एकीकरण को लेकर पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया था। अब 23 साल पर हड़ताल हो रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में अप्रैल से पहले उपकेंद्रों के मरम्मत का काम चल रहा है। हड़ताल के चलते मरम्मत का काम प्रभावित हो रहा है।

इसके अलावा लोगों को नए कनेक्शन मिलने में दिक्कत हो रही है। अगर कोई उपभोक्ता अपना बिल सही कराने के लिए उपकेंद्र जाता है, तो उसको भी परेशानी झेलनी पड़ेगी। साथ ही अगर कहीं फॉल्ट आता है, तो बिजली कर्मचारी उसको बनाने से इनकार भी कर सकते हैं।

सरकार करवा रही तोड़-फोड़'
आंदोलन में शामिल सीटू के प्रदेश सचिव प्रेमनाथ राय का कहना है कि कर्मचारियों पर तोड़-फोड़ का आरोप लगाया जा रहा है। यह बिल्कुल गलत है। सच्चाई यह है कि आंदोलन को कमजोर करने और हड़ताल खत्म करने के लिए खुद सरकार के लोग बिजलीघर पहुंचकर तोड़-फोड़ कर रहे हैं। यहां तक की जनता के बीच गलत प्रचार किया जा रहा है। हमारी लड़ाई जनता के लिए है। निजीकरण के बाद बिजली महंगी होगी। उसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

अब पढ़िए कर्मचारियों की प्रमुख मांगें-

  • 9 साल, 14 साल और 19 साल की सेवा के बाद तीन प्रमोशन वेतनमान दिया जाए।
  • निर्धारित प्रक्रिया के तहत चेयरमैन, प्रबन्ध निदेशकों व निदेशकों का चयन किया जाए।
  • बिजली कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए।
  • ट्रांसफॉर्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश वापस लिए जाए।
  • 765/400/220 केवी विद्युत उपकेंद्रों को आउटसोर्सिंग के जरिए चलाने का निर्णय रद्द हो।
  • आगरा फ्रेंचाईजी व ग्रेटर-नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाए।
  • ऊर्जा कर्मियों की सुरक्षा के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
  • तेलंगाना, पंजाब, दिल्ली, ओडिशा की तरह ऊर्जा निगमों के समस्त संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए।
  • बिजली कर्मियों को कई साल से लंबित बोनस का भुगतान दिया जाए।
  • भ्रष्टाचार-फिजूलखर्ची रोकने के लिए 25 हजार करोड़ के मीटर खरीद के आदेश को रद्द किया जाएं।

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